शुक्रवार, 22 जुलाई 2011

राज बिजारनियाँ

राज बिजारनियाँ
bijaraniyaji , kai dina baad thaanro blog padhyo. majo aagyo. photo pradarshani bahut pyari laagi.
Ratan Jain,
EDITOR MARWARI DIGEST
PARIHARA

कविता -रतन जैन

रात अँधेरी पथ पर बैठा दीपक लेकर कौन?
नहीं हाथ को हाथ सूझता कज्जल्मय भू-व्योम!
अट्टहास कर उठा प्रभंजन ,लुप्त तारका हास
दरक उठे पहाड़ हुए इति दीपों के उच्छ्वास!
पर कैसी इस प्रलयकाल में स्वर्ण वर्तिका मौन!
बहुत प्रयास किये जन्झा ने पर न बुझा यह दीप
आहतभागी मान गर्विता होकर अति भयभीत।
लिए कौन ये विजय रश्मियाँ भगा रहा तमतौम
रतन जैन

गुरुवार, 4 मार्च 2010

में। आपकी यह साईट रोज देखती हूँ मुझे मारवाड़ी डाइजेस्ट अच्छी लगती है । गर्व चंडालिया और चहक चंडालिया गन्दी बाई

शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2010

आगत के स्वागत में खुल्ला द्वार रखते हैं,

घर के अन्दर वे नंगी तलवार रखते हैं!

राजेंद्र स्वर्णकार